टीस
- Kapil Verma

- Mar 24, 2025
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Updated: Mar 2
याद की टीस में जीने के अब तरीक़े मिले हैं कई,
वक्त की डोर से मैंने भी ज़ख़्म दिल के सिले हैं कई।
ज़िंदगी से हमेशा अमीरों के शिकवे-गिले हैं कई,
सब्र के फूल, ग़ुर्बत की मिट्टी में अक्सर खिले हैं कई।
सोहबतें हैं कई, तोहमतें हैं कई, सब्र रखना ज़रा,
इस रह-ए-शौक़ में हर नए रंग के सिलसिले हैं कई।
काविशों से तराशी तिरी राह यह राएगाँ तो नहीं,
रुक ज़रा देख मुड़कर भी, पीछे तिरे क़ाफ़िले हैं कई।
नक़्श-ए-निय्यत, ख़ुद अपना बदलता रहा हूँ मसाइल के साथ,
मुल्क-ए-दिल में मिरे मतलबी वहशियों के जिले हैं कई।

Meaning of:
टीस : कसक
ग़ुर्बत : ग़रीबी
सोहबत : साथ, संगत
तोहमत : झूठा आरोप
रह-ए-शौक़ : लगाव या लगन का रास्ता
काविश : जुस्तजू और मेहनत से पूरा किया हुआ काम
राएगाँ : बेकार
नक़्श : छवि
मसाइल : समस्याएँ
ग़ज़ल
Meter (बह्र): मुतदारिक सालिम मुसम्मन (212*6)


Very good