बराए-नाम
- Kapil Verma

- Dec 18, 2024
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Updated: Mar 2
ख़ुशी का ज़िक्र राहों में बराए-नाम लगता है,
यहाँ हैं मरहले ऐसे कि जीना काम लगता है।
नुमाइश है यहाँ लगती, जमाल-ए-जिस्म की हर-सू,
उतारा जिस क़दर 'इज़्ज़त को, उतना दाम लगता है।
अमीरी जो कुचल जाए ग़रीबी को कहीं इक रात,
सहर को फिर किसी मज़दूर पर इल्ज़ाम लगता है।
उलझती सी डगर है ज़िंदगी, चलते हुए जिसमें,
निराला एक पेच-ओ-ख़म यहाँ हर गाम लगता है।
मिरे दिल की गली में था बड़ा मशहूर जो इंसान,
वही अब बाम-ए-हाज़िर से बड़ा गुमनाम लगता है।
सुना था दिल से निकले बात जो, दिल तक पहुँचती है,
तो क्यों रस्मी उसे दिल से लिखा पैग़ाम लगता है?
मुझे वो दिलनशीं उठता है जब भी छोड़ जाने को,
धुआँ छाता है फिर दिल की सड़क पर जाम लगता है।
उजाला टिक नहीं पाता मिरी आँखों में इक पल भी,
जले जाना तिरा शम'अ बड़ा नाकाम लगता है।

Meaning of:
बराए-नाम : नाममात्र को, थोड़ा सा, कहने भर को
मरहला : चरण, पड़ाव
जमाल : ख़ूबसूरती, रूप
सू : दिशा, ओर, तरफ़,
सहर : भोर, सवेरा
पेच-ओ-ख़म : जटिलता, ऊँच-नीच
गाम : क़दम
बाम-ए-हाज़िर : वर्तमान-काल की छत
दिलनशीं: जो दिल में बैठ गया हो
शम'अ: मोमबत्ती
ग़ज़ल
Meter (बह्र): हज़ज मुसम्मन सालिम (1222*4)



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