top of page

बयान

  • Writer: Kapil Verma
    Kapil Verma
  • Sep 11, 2024
  • 1 min read

Updated: Apr 20, 2025

बयाँ करते, बहुत सोचा हुआ सा कुछ

मगर बस रह गया भूला हुआ सा कुछ


अभी ही दिल की अलमारी समेटी है

मिलेगा कल यहाँ बिखरा हुआ सा कुछ


हयाती में हयाती थी तिरे होते

बचा है अब तो बस थोपा हुआ सा कुछ


घना जंगल दबा, कंक्रीट के नीचे

खिले फिर भी वहाँ महका हुआ सा कुछ


सिवा मेरे मुझे था और क्या हासिल?

पर अब है रूह में पनपा हुआ सा कुछ


यतीमों में हुनर ये क़ाबिल-ए-ता'रीफ़

कि ख़ुद में वो रखें पाला हुआ सा कुछ


ग़ुरूर-ए-हुस्न का मस्कन रहे दो दिन

बक़ाया दिन है बस उजड़ा हुआ सा कुछ


लड़कपन में बिलखना भी मुनासिब था

ग़ज़ल में अब रखूँ सहमा हुआ सा कुछ


Pathway through a dense, leaf-covered forest under bare trees. Birds fly at the horizon. Monochrome tones create a serene, mysterious mood.

Meaning of:

  • हयाती : ज़िंदगी, life

  • यतीम : अनाथ, orphan

  • ग़ुरूर-ए-हुस्न : ख़ूबसूरती का घमंड, narcissism, pride in one's beauty

  • मस्कन : मकान, निवासस्थान, residence

  • मुनासिब : उचित, ठीक,

ग़ज़ल

Meter (बह्र): हज़ज मुसद्दस सालिम (1222 1222 1222)

Comments


©2021 by Kapil Verma

bottom of page