शह-मात
- Kapil Verma

- Apr 20, 2021
- 2 min read
Updated: Apr 20, 2025
सारी उम्मीदों का क़त्ल किये जा रहा हूँ,
मैं दिल ये दुश्मन के हवाले, करे जा रहा हूँ।
यादों की टीस में जीना सीखते-सीखाते,
वक्त के धागों से ज़ख़्मी दरारें सिये जा रहा हूँ।
कुछ अपनी ढाढ़स के कश पीते-पीलाते,
भरे हुजूम में भी तन्हा, जीते जा रहा हूँ।
हर गोते में नहीं मिलता कुछ मात सिवाए,
गहरे समंदर से, सीपी खोजे जा रहा हूँ।
हर सूरत में, मुजरिम मैं, तो क्या दुनियावी?
क्या रूहानी? सबसे विदा हुए जा रहा हूँ।
हर चाल, करती जाती है शह-मात ज़िंदगानी
मैं भी वक़्त का सरमाया फेंके जा रहा हूँ।
रोके से न रुके कुछ, फिसलनी हाथों मेरे,
नकदी-ए-नेकी-ए-आशना खोए जा रहा हूँ।
कम नहीं होता है जैसे मेरा ये ग़म-ए-जाँ,
मैं भी हर दिन का नाटक खेले जा रहा हूँ।
ख़राबों की नीलामी से क्या मिला करता है?
मैं कब से ये भी, नसीब के हाथों किये जा रहा हूँ।
बीमारी लाइलाज और न मंज़िल दर-पेश,
फिर भी, शिकवों की बस्ती उजाड़ते जा रहा हूँ।
मेरी बर्बादी का सबब, क्यों अपना कहलाए?
मैं ऐसी दिलकश बर्बादी से बचे जा रहा हूँ।
माथे पे सौग़ात-ए-शिकन क़ुबूल, तो है बात ,
बेज़ारी से यूँ भी, बे-मदद लड़े जा रहा हूँ।
रह के ठिकाने, लोगों के दिल में अब है नदारद,
गो मैं, रूई सा, जा-ब-जा उड़े जा रहा हूँ।
गिरते चले, अहम किरदार कहानी से मेरी,
ख़ुलूस से और थोड़ा खुद से जुड़े जा रहा हूँ।

Meaning of :
बारहा: बार-बार, Many times
कश: घूँट, Drag
हुजूम : भीड़, Crowd, Mob
दुनियावी : सांसारिक, दुनिया का, Worldly
रूहानी : आत्मिक, Spiritual
शह-मात : Checkmate
सरमाया: धन-दौलत, Wealth
ग़म-ए-जाँ : ज़िंदगी के दुःख, Calamity
नकदी : धन-दौलत, Cash, Currency
नेकी : कृपा, मेहरबानी, Kindness
आशना : जाने पहचाने, अपने, Friend, Companion
नकदी-ए-नेकी-ए-आशना : अपनों की मेहरबानियों का धन
ख़राबा : वीराना, खंडहर, Ruins
ला-दवा: निरुपचार, incurable
दर-पेश: सामने, in front (of)
सबब: कारण, Cause
दिलकश: लुभाने वाला, Tempting
बेज़ारी : परेशानी, Nuisance
रह : Stay
नदारद : लुप्त, खाली, Lost
गो: यद्यपि, चाहे, although, though
जा-ब-जा : जगह जगह, everywhere
ख़ुलूस : सच्चाई, Purity
मुसलसल ग़ज़ल
Meter (बह्र) : मुतकारिब मुसद्दस महज़ूफ़ (22*6)



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