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उसकी रहमत अबदी है (Psalm 136)
रब का शुक्र करो मिलकर बस उसकी रहमत अबदी है
वो है ख़ुदाओं का भी ख़ुदावंद उसकी रहमत अबदी है

Kapil Verma
Jun 19, 20251 min read


फ़ुर्सत
अलसायी सी दुपहरी में,
फ़िक्रों की तेज़ धूप से
बचकर
बेफ़िक्री की छाँव में जब,
तुम बैठोगे थोदी देर,

Kapil Verma
May 30, 20231 min read


क़िस्मत
एक बच्चे की हथेली से फिसलती
रेत में तिनका ज़मीं में जा मिलेगा
पर अनोखी बात होगी

Kapil Verma
Nov 30, 20221 min read


तदबीर
आजकल, ज़िंदगी मुझे क्यूँ ये
आश्नाओं सी रास आती है?
रोज़ बाद-ए-सबा यहाँ कैसे
ख़्वाब जैसे पयाम लाती है?

Kapil Verma
Feb 19, 20221 min read


तसलसुल
इस अनजान सफ़र में डर है,
दूर बहुत निकल आया हूँ मैं,
दूर भी इतना,
मैंने होश-ओ-हवास की हद तक
पार करी है।

Kapil Verma
Nov 25, 20212 min read


तेरे पीछे हम खड़े
जंग में मरने के ख़्वाहिश-मंद दीवाने बड़े,
कोई वजह तो दे, हम किस वास्ते लड़े?

Kapil Verma
Oct 13, 20211 min read


मराहिल रुख़्सती के
ये चंचल नज़रों की अबरू,
ये मुसकाता रुख़, ये गेसू,
और इक बार मैं इनको देखूँ।

Kapil Verma
Aug 27, 20211 min read


कॉन्वोकेशन
मेरी डिग्री लेने का मौक़ा था जब
हर-सू हलचल, हर-सू ही था हंगामा,
उमड़ा था, रंगीं मंज़र में ग़ज़ब का जोश,
उस जलसे में दिखते थे, हँसते-गाते,
फ़ोटो लेते, मेरे साथ पढ़े सब लोग।

Kapil Verma
Aug 16, 20211 min read


आसमानी क़र्ज़
अंबर! तुम इतने आ'ला हो,
लेकिन तुम भी हमारे जैसे
बे-हद क़र्ज़ में क्यूँ जीते हो?

Kapil Verma
Jul 9, 20211 min read


तो लिखता हूँ
बाहर आना चाहे पीड़ पुरानी जब,
ज़िंदा होतीं तस्वीरों की सुन लूँ जब,
इक एहसान के नीचे कुचले जाऊँ जब,
तो लिखता हूँ।

Kapil Verma
Jun 17, 20211 min read


शह-मात
सारी उम्मीदें बारहा, मारे जा रहा हूँ,
मैं दिल ये दुश्मन के हवाले, करे जा रहा हूँ।
यादों की टीस में जीना सीखते-सीखाते,

Kapil Verma
Apr 20, 20212 min read


तेरा आँचल
यह मन, अक्सर तेरी सूरत को तरसाता है।
ख़्वाब तुझे जब पल भर को ज़िंदा कर जाता है।
अनजाने चेहरे में, अक्स तेरा दिख जाता है।
माँ, उस रोज़ आँचल तेरा, याद खूब आता है।

Kapil Verma
Apr 9, 20212 min read


लाज़मी अहसास
ख़ुश-चेहरे ही अपने नहीं
अपनों को भी हसीं मानो।
दिलकश सपनों का साहिल
आँखों तक कामिल जानो।

Kapil Verma
Feb 4, 20211 min read


मेरे पापा
मुँह पर ज़रा न करते थे तारीफ़ें वो,
पीछे बड़े क़सीदे कसते थे पापा।

Kapil Verma
Jul 11, 20202 min read
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