मराहिल रुख़्सती के
- Kapil Verma

- Aug 27, 2021
- 1 min read
Updated: Apr 22, 2025
ये चंचल नज़रों की अबरू,
ये मुसकाता रुख़, ये गेसू,
और इक बार मैं इनको देखूँ।
ये गिरवीदा सी रंगीं शब,
जुंबिश से लबरेज़ हुए लब,
इनको अब मैं रुख़्सत कर दूँ।
ज़ुल्मत में अश्कों की शिरकत,
नम आँखों की फीकी रंगत,
इनमें अम्न की स्याही भर दूँ।
सहरा-ए-दिल में ये ख़राबा
और उसमें ये शोर-शराबा,
आज इसमें ख़ामोशी कर दूँ।
ज़ख़्म हरा करते ये सारे,
दिल में कुछ बेचैन शरारे,
इनकी आग बुझा कर रख दूँ।
ये बद-हाली, बेबस नज़्में,
बुझते शोले, सूनी बज़्में,
इक परवाने को मैं दे दूँ।
रंज-ओ-ग़म में डूबी रातें,
रूखी-रस्मी सी ये बातें ,
बिल-आख़िर, ख़ून इनका कर दूँ!

Meaning of:
मराहिल: पड़ाव, मंज़िलें
रुख़्सती : विदाई
गेसू : बाल
गिरवीदा: प्रेम में पागल
जुंबिश : गर्दिश, हलचल
लबरेज़: लबालब, भरा हुआ
ज़ुल्मत : अंधेरा
शिरकत : शामिल होना, साझेदारी
सहरा: रेगिस्तान
गिरह : गांठ
नज़्म : कविता
बज़्म : महफ़िल
परवाना : पतंगा
नज़्म Meter (बह्र): बहर-ए-मीर (22*4)


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