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मौज
देख कर आँखें ये, ठोकर खा रहे हैं, क्या करें?
इनमें मचली मौज से टकरा रहे हैं, क्या करें?

Kapil Verma
Mar 22, 20251 min read


रुबाइयाँ
दुनिया ने लटका दी है सूरत-ए-इश्क़ खुल कर

Kapil Verma
Aug 1, 20241 min read


रात भर
बारहा दिल मचलता रहा रात भर
आपको याद करता रहा रात भर
दास्ताँ में नया मोड़ आता रहा
हर कदम डगमगाता रहा रात भर

Kapil Verma
Apr 23, 20241 min read


अजायबघर
ये इंसानी फ़ितरत है कि वो जब तक
कोई नाम न दे शय को उसका तब तक,
कोई उसे संजीदा शय नहीं मानेगा
नाम नहीं तो उसकी कोई हस्ती ही नहीं!

Kapil Verma
Apr 10, 20242 min read


है बाकी
करवट ली है माना, किस्मत ने ज़रूर शाकी,
नींद में अभी उसकी कितनी अंगड़ाई है बाकी।
ज़रा सा ही सही मग़र, सपने को तो जीया है,

Kapil Verma
Jul 10, 20221 min read


तदबीर
आजकल, ज़िंदगी मुझे क्यूँ ये
आश्नाओं सी रास आती है?
रोज़ बाद-ए-सबा यहाँ कैसे
ख़्वाब जैसे पयाम लाती है?

Kapil Verma
Feb 19, 20221 min read


तसलसुल
इस अनजान सफ़र में डर है,
दूर बहुत निकल आया हूँ मैं,
दूर भी इतना,
मैंने होश-ओ-हवास की हद तक
पार करी है।

Kapil Verma
Nov 25, 20212 min read


सारी वीरानियाँ (Original Song)
देखा था, तुम्हें जो मैंने देखा था,
हर घड़ी और हर पहर ख़ामोश था।

Kapil Verma
Oct 20, 20211 min read


तेरे पीछे हम खड़े
जंग में मरने के ख़्वाहिश-मंद दीवाने बड़े,
कोई वजह तो दे, हम किस वास्ते लड़े?

Kapil Verma
Oct 13, 20211 min read


मराहिल रुख़्सती के
ये चंचल नज़रों की अबरू,
ये मुसकाता रुख़, ये गेसू,
और इक बार मैं इनको देखूँ।

Kapil Verma
Aug 27, 20211 min read


तो लिखता हूँ
बाहर आना चाहे पीड़ पुरानी जब,
ज़िंदा होतीं तस्वीरों की सुन लूँ जब,
इक एहसान के नीचे कुचले जाऊँ जब,
तो लिखता हूँ।

Kapil Verma
Jun 17, 20211 min read


शह-मात
सारी उम्मीदें बारहा, मारे जा रहा हूँ,
मैं दिल ये दुश्मन के हवाले, करे जा रहा हूँ।
यादों की टीस में जीना सीखते-सीखाते,

Kapil Verma
Apr 20, 20212 min read


लाज़मी अहसास
ख़ुश-चेहरे ही अपने नहीं
अपनों को भी हसीं मानो।
दिलकश सपनों का साहिल
आँखों तक कामिल जानो।

Kapil Verma
Feb 4, 20211 min read
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