मौज
- Kapil Verma

- Mar 22, 2025
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Updated: Mar 2
झील सी आँखों में ग़ोते खा रहे हैं, क्या करें?
इनमें मचली मौज से टकरा रहे हैं, क्या करें?
काश, माओं की नज़र तुमको मिली होती, पर अब
जो तुम्हें भद्दे नज़र हम आ रहे हैं, क्या करें?
अब नहीं जीना मयस्सर इस अज़िय्यत में यहाँ
बस मुसलसल साँस लेते जा रहे हैं, क्या करें?
गुल हुई है जब से बिजली शहर-ए-दिल में, 'आदतन
शा'इरी की शम'अ हम सुलगा रहे हैं, क्या करें?
मुफ़लिसी को जुर्म में शामिल किया है, आजकल
मेहनती को दार पर लटका रहे हैं, क्या करें?
कर दिया रुख़्सत उसे, अब हाल मेरा छोड़िए
ग़ैर भी पुर-अश्क हो चिल्ला रहे हैं, क्या करें?
हुस्न तो ले आए पैसों की बदौलत वो मगर
हाए, ये अख़्लाक़ सब बतला रहे हैं, क्या करें?
उम्र से पहले बड़ा होना पड़ा था तब हमें
अन्दर अब बचपन हमीं दफ़ना रहे हैं, क्या करें?

Meaning of:
मयस्सर : मिलना, हासिल होना, to be available
अज़िय्यत : मन में होने वाला दुख, distress
मुसलसल : लगातार, constant
मुफ़लिसी : ग़रीबी, poverty
दार : फाँसी, सूली, death by hanging, capital punishment
पुर-अश्क : आँसुओं से भरे हुए, tearful
अख़्लाक़ : आचार, आचरण, manners, etiquette
ग़ज़ल
Meter (बह्र): रमल मुसम्मन महज़ूफ़ (2122*3 212)


क्या करें क्या न करें, कब्ज ए कशमकश है क्या करे ?
काश! कशमकश ए काश नहीं रहे , पर ये काश कुंडली में है , क्या करे ?