अजायबघर
- Kapil Verma

- Apr 10, 2024
- 2 min read
Updated: Apr 20, 2025
ये इंसानी फ़ितरत है कि वो जब तक
कोई नाम न दे शय को उसका तब तक,
कोई उसे संजीदा शय नहीं मानेगा
नाम नहीं तो उसकी कोई हस्ती ही नहीं!
तो सोचा, क्यों ना अपनी हस्ती को ही
कोई नाम अता करने का काम करें?
"अजायबघर" कैसा रहेगा?
सारी इंसानियत का तो क्या कहूँ,
कम से कम मैं तो
मिरी ज़ात की चौकियों का एक मजमुआ हूँ,
ख़ालिस अफ़सुर्दा चौकियों का,
क्या है ना कि,
मसर्रत की चौकियां तो
अंदर जज़्ब हो जाती हैं।
जहाँ जहाँ जिस भी अज़ीज़ से बिछड़ा
एक हिस्सा मेरा वही रह गया
एक चौकी में, मुंतज़िर बनकर
उसी हाल में, उसी साल में,
उस शख़्स के इंतिज़ार में
या शायद उसी के साथ?
वो मुंतज़िर, हर करीब आते साए में,
उसी बिछड़े शख़्स की तफ़्तीश करता है,
कि कहीं इसमें वो शख़्स मिल जाए।
वो मुंतज़िर, कभी
एक राह ताकता, गुम सा बच्चा है,
तो कभी एक शौकिया मजरूह जवान,
और न जाने क्या-क्या?
अच्छा,
एक दरख़्वास्त है तुमसे
गर तुम भी मुझसे मिलो तो,
अग़्यार से मेरे यार बनो तो,
क्या तुम उन चौकियों को समेट लाओगे?
या चलो, कम से कम देख ही आना,
क्या है ना कि,
उन चौकियों से नही गुजरे
तो मुझसे नहीं मिले,
मेरे नाम वाले एक पैकर से मिले।
ख़ैर, ये भी वाजिब बात है कि,
मुझसे मिल कर भी क्या करोगे?
जो तुम भी शायद बिछड़े तो
इसी मजमूए में शामिल हो जाओगे,
मेरे मुंतज़िर के मुंतज़र हो जाओगे,
अपनी चौकी में आराम से बसर करना,
क्या है ना कि,
नए अज़ीज़ों में तुम भी तलाशे जाओगे।

Meaning of:
अजायबघर : संग्रहालय, museum
फ़ितरत : स्वभाव, nature
संजीदा : गम्भीर, serious
ज़ात : हस्ती, existence
मजमुआ : संग्रह, collection
ख़ालिस अफ़सुर्दा : केवल उदास, purely dejected
मसर्रत : ख़ुशी, pleasure
जज़्ब : मिल जाना, absorption
मुंतज़िर : राह देखने वाला, one who waits
तफ़्तीश : छानबीन, search
शौकिया मजरूह : शौक से घायल, happily wounded
दरख़्वास्त : निवेदन, request
पैकर : शरीर, body
वाजिब : उचित, reasonable
मुंतज़र : जिसका रासता देखा जाए, awaited
बसर : गुज़ारा, course of life


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