तेरे पीछे हम खड़े
- Kapil Verma

- Oct 13, 2021
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Updated: Apr 20, 2025
जंग में मरने को राज़ी दीवाने बड़े
कोई वजह दे हम किसके वास्ते लड़ें
शोले दोनों जानिब जले तो ही बेहतर
इक तरफ़ा झुलसन में हम भी क्यूँ ही पड़ें
नज़्म जो मुँह पर लटकी सीने में अटकी
अश्कों में थी उसे कोई अश्कों में पढ़े
घाटे के लिए किसने खेले ख़तरों के खेल
सिला मिले गर कोई तो हम पहाड़ चढ़ें
फ़ानी से पल दो पल के साथ का क्या है?
उम्रों की बात हो तो तेरे पीछे हम खड़े

Meaning of:
जानिब: तरफ़, ओर
नज़्म: कविता
अश्क: आंसू
सिला: परिश्रम का फल
फ़ानी: जानेवाला, नाशवान
नज़्म-ए-मुक़फ़्फ़ा
Meter (बह्र) : बहर-ए-हिन्दी मुतकारिब मुसद्दस मुज़ाफ़ (22*5 2)



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