दर्द की ममता
- Kapil Verma

- Sep 23, 2021
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Updated: Apr 20, 2025
दर्द, एक माँ है, जिसने ऐसी औलादें जनीं हैं, जो इस माँ का आँचल थामकर, दुनिया में, मिसालें बनीं हैं।
ये नस्लें, जो चहुँओर चली है, इसके आँगन की सिसकियों और अश्कों में, बड़े नाज़ों से पली हैं। छुट्टी के दिनों में कभी, ये माँ उन्हें, अपनी पड़ोसन
'खुशी' के घर छोड़ तो जाती है। लेकिन बिगड़ ना जाए बच्चे ये सोच,
फिर से, पास उन्हें बुलाती है। ये वो माँ है, जिसका लाड़ तो, बच्चों के तन से, तेवर के ज़ेवर पिघलाना है, उनके चेहरों से, मुस्कुराहटें ढलकाना है। उनकी नींदों से भरी, सर्द आंखों में, इंक़लाब के जलते अंगारे चमकाना है। नादान फरमाइशें उनकी सारी, बेरहमी से उसने खूब धुनी है। ये उस माँ की कारीगरी है की, उधड़ी रातों से, उसने सहर बुनी हैं। उसकी गोद में बेखबर भी बा-ख़बर बनेगा, वो ग़ाफ़िल भी हर रोज़, कुछ नया जनेगा, जो इस माँ से, माँ बनने का मर्म पढ़ेगा।

Meaning of:
इंक़लाब : क्रांति, बदलाव
धुनना : पीटना
सहर : सुबह
बा-ख़बर : सचेत, होशियार
ग़ाफ़िल : अचेत, असावधान
मर्म : भेद, रहस्य


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