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रुबाइयाँ

  • Writer: Kapil Verma
    Kapil Verma
  • Aug 1, 2024
  • 1 min read

Updated: May 4, 2025

दुनिया ने टांग दी है तस्वीर-ए-इश्क़ खुल कर

ताले सी जड़ रहेगी दरिया के पास रुल कर

गो फेंक दी ख़ला में सब चाबियाँ हैं इसकी

लेकिन मिसाल दुनिया ही देगी शोर-ग़ुल कर


इतना मुझको न याद आते जाओ

बस इक नाता यही निभाते जाओ

ये सब फ़िक्रें बड़े जतन से सोएँ

क्यों ना-हक़ तुम इन्हें जगाते जाओ


A world (earth) in form of a lock

Meaning of:

  • रुबा'ई : काव्य की एक शैली जिस में चार पक्तियों में बात पूरी हो जाती है, a quatrain

  • रुल : रोना, cry

  • गो : यद्यपि, though

  • ख़ला : खालीपन, void, a vacant place or space

  • ना-हक़ : बे-वजह, without any reason


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©2021 by Kapil Verma

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