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क़िस्मत

  • Writer: Kapil Verma
    Kapil Verma
  • Nov 30, 2022
  • 1 min read

Updated: Apr 13

एक बच्चे की हथेली से फिसलती

रेत में तिनका ज़मीं में जा मिलेगा

पर अनोखी बात होगी

जब इसी क़िस्से से पहले, अदना सा वो

एक तिनका, यूँ रचाए स्वाँग जिससे

शाम के सूरज से, सबके सामने ही

इक किरण, झट से, चुरा ले जाए उसकी!


बात अनहोनी है, लेकिन ये करिश्मा

है उसी तिनके के हिस्से, तो मुझे फिर

क्यूँ नहीं उस एक तिनके से जलन हो?


क्यूँकि, रिसती रेत जितना भी नहीं मैं

तेरे हिस्से

और ढलती शाम जितना भी नहीं तू

मेरे हिस्से।


Person meditates on sandy beach with spiral patterns at sunset, facing calm ocean waves under dramatic clouds. Peaceful and serene mood.

Dedicated to Mumma

आज़ाद-नज़्म

Meter (बह्र) : रमल मुसद्दस सालिम (2122*3)


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