तदबीर
- Kapil Verma

- Feb 19, 2022
- 1 min read
Updated: Apr 13
आजकल, ज़िंदगी मुझे क्यूँ ये
आश्नाओं सी रास आती है?
रोज़ बाद-ए-सबा यहाँ कैसे
ख़्वाब जैसे पयाम लाती है?
सुब्ह, बुझते हुए सभी तारे
इन-दिनों हाल पूछ लेते हैं।
गर्म-चश्मे, कड़क सी सर्दी में
किस तरह मुझको खोज लेते हैं?
मेरी राहों के फूल-पत्ते ये
सब मिरे साथ में टहलते हैं।
आज, ऊँचे दरख़्त भी झुक कर
छाँव मुझको शदीद देते हैं।
वादियाँ और ये पहाड़ सभी
गर्म-जोशी के साथ मिलते हैं।
चाँद-सूरज नए लिबासों में
कुछ अदब से सलाम करते हैं।
काम सब भूलकर ये पंछी भी
ख़ास नग़्में नुमायाँ करते हैं।
इत्तिफ़ाक़न नहीं, मुझे तो ये
सब तिरे इंतिज़ाम लगते हैं!

Dedicated to the God Almighty
Meaning of:
तदबीर - प्रबंध, Arrangement, Planning
आशना - अपना, Family
बाद-ए-सबा - सुबहों की हवाएँ, Morning breeze
पयाम - ख़बर, Message
चश्मा - सोता, स्रोत, A spring, Source
दरख़्त - पेड़, Tree
शदीद - अत्याधिक, Intense
अदब - सम्मान, Respect
नग़्मा - गीत, Song
नुमायाँ - दिखाना, To show
नज़्म
बह्र: ख़फ़ीफ़ मुसद्दस मख़बून महज़ूफ़ मक़तू (2122 1212 22)


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