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दुनिया

  • Writer: Kapil Verma
    Kapil Verma
  • Apr 21, 2024
  • 1 min read

Updated: Mar 2

तुम्हें क्या बताऊं ये कैसी है दुनिया?

शराबी के वादों सरीखी है दुनिया


ज़रा सी है मीठी दही और बाकी

कसैली, है मैली, नुकीली है दुनिया


कभी तो किसी शाम जैसी है रंगी

कभी रंग में तर सफ़ेदी है दुनिया


न देखा, न जाना गया जो कभी भी

उसी ख़्वाब की तो ख़ुमारी है दुनिया


अमीरों की क़िल्लत, फ़क़ीरों की दौलत,

समझदार की बेवक़ूफ़ी है दुनिया


जनाजे के गुल या हो शादी की माला

ख़ुदा-ए-चमन की असीरी है दुनिया


कभी है पुरानी कभी है नई सी

तबाही के मा'मूल जैसी है दुनिया


A painter with a blank and a coloured canvas as well

Meaning of:

  • असीरी : गिरफ़्तारी, imprisonment

  • मा'मूल : रिवाज, daily routine

ग़ज़ल

Meter (बह्र) : मुतकारिब मुसम्मन सालिम (122*4)

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©2021 by Kapil Verma

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