कहकशाँ
- Kapil Verma

- Aug 1, 2024
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Updated: Mar 2
मिरे हबीब मुझे हिज्र इंतिहाई दे
कि रू-ब-रू न हो तू फिर भी तू दिखाई दे
मुदाम तिश्ना है तहरीक तर्ज़-ए-नौ वाली
घड़ी-घड़ी जो नए ख़ून की दुहाई दे
करे है याद तिरी गर्दिशों में यूँ भी असर
कड़क सी ठण्ड में जैसे कोई रज़ाई दे
हयात आए कहाँ से हलाक ज़र्रों में
ज़ुहूर, क़ैद किए बिन नहीं रवाई दे
ये दर्द तो अभी सहना पड़ेगा सीपी को
गुहर बग़ैर न क़ुदरत कभी रिहाई दे
छिपे हैं कहकशाँ में कुछ फ़रेब के अफ़लाक
हर एक बुर्ज ज़रूरी न रहनुमाई दे
मैं मरहला-ए-जुनूनी पहुँच चुका हूँ, अब
मक़ाम-ए-आख़िर-ए-उलफ़त मुझे दिखाई दे
Meaning of:
हबीब : प्यारा, dear
हिज्र : जुदाई, वियोग, separation
इंतिहाई : आखिरी हदवाला, extreme, utmost
मुदाम : निरन्तर, continually
तिश्ना : प्यासा, thirsty
तहरीक : आंदोलन, movement
तर्ज़-ए-नौ : नया ढंग, new style
गर्दिश : मुसीबत, problems
हयात : ज़िंदगी, life
हलाक : मारा हुआ, dead
जर्रा : अणु, कण, atom
ज़ुहूर : उत्पत्ति, बरकत, emergence
रवाई : चलन, पूरी होना (आशा), flow
गुहर : मोती, pearl, gem
अफ़लाक : आकाश समूह, heavens, skies
कहकशाँ : आकाशगंगा, milky way, galaxy
बुर्ज : तारामंडल, नक्षत्र, constellation
रहनुमाई : अगुवाई, राह दिखाना, guidance
मरहला : चरण, stage
मक़ाम : जगह, स्थान, place
ग़ज़ल
Meter (बह्र): मुज्तस मुसम्मन मख़बून महज़ूफ़ मस्कन (1212 1122 1212 22)


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