तपाक
- Kapil Verma

- Apr 16, 2025
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Updated: Mar 2
मुझे गले लगाने को, सभी से वो गले मिले,
मिले भी यूँ कि बच्चा कोई ज़ोर-शोर से मिले
तू मेरे वाहिमों के शहर की नदी, तो रेल मैं,
कई दफ़ा तू रह में, धूप सेंकते मुझे मिले
ज़रा नहीं सुनी अना ने एक आइने की जब,
तो राह रोकते मुझे हज़ार आइने मिले
बताएँ साहब, आइटम मैं, कौन सा निकाल दूँ?
मुझे रसद में ज़ख़्म तो हर एक रंग के मिले
फ़क़त हैं इल्म दाइरे, जहाँ शदीद चाह हो,
सितारे, सुब्ह भी मुझे फ़लक से झाँकते मिले
ख़िज़ाँ हो तो बहार भी बराबरी से हो यहाँ,
मिले ग़म-ए-हयात, तो इसी हिसाब से मिले
चढ़ा रखी थी ठोस जिल्द सोहबतों की आपने
बज़ार में फिर आप क्यूँ किसी को खोजते मिले?
था लाज़िमी, निकल न जाए इक गुहर भी आँख से,
तभी तो दर्द यह तुम्हें सुख़न में, बोलते मिले

Meaning of:
वाहिमा : भ्रम, कल्पना शक्ति, fancy, imagination
रह : ‘राह' का लघु,, रास्ता, path
अना : स्वयं, ख़ुदी, self, ego
रसद : हिस्सा, पैदावार, आमदनी आदि, supplies
फ़क़त : केवल, only
इल्म : ज्ञान, जानकारी, knowledge
शदीद : अत्याधिक, प्रचुर, plenty, abundant
ख़िज़ाँ : पतझड़, autumn
हयात : ज़िन्दगी, life
सोहबत : साथ, संगत contacts
गुहर : मोती, pearl
सुख़न : काव्य, शाइरी, poetry
ग़ज़ल
Meter (बह्र) : हज़ज मुसम्मन मक़बूज़ (1212*4)


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