माँ तो माँ होती है
- Kapil Verma

- May 9, 2020
- 1 min read
Updated: Apr 20, 2025
भर देती पेट हमारा
खुद भले भूखे सोती है।
आँसुओं से गले में हमारे,
माला मोतियों की पिरोती है,
माँ तो माँ होती है।
खुद को खाली करती सदा
ममता से जो भरी होती है।
लोरियों, थप्पियों से सुलाती,
अंधेरों में जगते-जगाती,
खुद जलकर, ये वो ज्योति है,
माँ तो माँ होती है।
गई भी जो दूर हमसे,
देखा, तो कुछ लाकर लौटी है।
गंदे-मैले काजों को हमारे
अपनी दुआओं से धोती है,
माँ तो माँ होती है।
हँसती खिल-खिलाती,
सामने तुम्हारे,
छिप-छिपकर जो रोती है।
पाना चाहे क्या हमसे?
जो सब हमारे लिए खोती है,
माँ तो माँ होती है।




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