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संग-दिल
मैं संग-दिल, हर जगह ग़ुबार-ए-सितम से लबरेज़ चलता हूँ
मगर मिरी माँ के ज़िक्र पर आज भी सरासर पिघलता हूँ

Kapil Verma
Jan 13, 20251 min read


रफ़ू
अजनबी तबस्सुम भी, यूँ असर करे कोई
प्यार से रफ़ू जैसे, ज़ख़्म पर करे कोई

Kapil Verma
Oct 20, 20241 min read


अर्जी
जी करता है कुछ उबलता सा लिख दूँ,
लेकिन सीने की आग बुझ गई है,
और बुझती आग से याद आया,
एक इंसान कितनी बार मरता है?
रिश्तों में, किश्तों मे

Kapil Verma
Dec 15, 20231 min read


फ़ुर्सत
अलसायी सी दुपहरी में,
फ़िक्रों की तेज़ धूप से
बचकर
बेफ़िक्री की छाँव में जब,
तुम बैठोगे थोदी देर,

Kapil Verma
May 30, 20231 min read


कॉन्वोकेशन
मेरी डिग्री लेने का मौक़ा था जब
हर-सू हलचल, हर-सू ही था हंगामा,
उमड़ा था, रंगीं मंज़र में ग़ज़ब का जोश,
उस जलसे में दिखते थे, हँसते-गाते,
फ़ोटो लेते, मेरे साथ पढ़े सब लोग।

Kapil Verma
Aug 16, 20211 min read


घर
बहुत से घरों में रहा हूँ मैं अब तक,
एक घर है वो, दादी का दुलार,
उस बड़े से, साझे मकान में,
जिसे अब हम पुराना-घर कहते हैं।

Kapil Verma
Jul 16, 20211 min read


'जीनू' के नाम
एक अजीब से नाम वाली लड़की के नाम,
एक सुख़न मेरी सखी, मेरी बहन के नाम,

Kapil Verma
Jun 9, 20211 min read


तेरा आँचल
यह मन, अक्सर तेरी सूरत को तरसाता है।
ख़्वाब तुझे जब पल भर को ज़िंदा कर जाता है।
अनजाने चेहरे में, अक्स तेरा दिख जाता है।
माँ, उस रोज़ आँचल तेरा, याद खूब आता है।

Kapil Verma
Apr 9, 20212 min read


Mumma
Mumma, you come to my dreams as if you’ve never been gone

Kapil Verma
Sep 25, 20202 min read


मेरे पापा
मुँह पर ज़रा न करते थे तारीफ़ें वो,
पीछे बड़े क़सीदे कसते थे पापा।

Kapil Verma
Jul 11, 20202 min read


माँ तो माँ होती है
भर देती पेट हमारा
खुद भले भूखे सोती है।
आँसुओं से गले में हमारे,
माला मोतियों की पिरोती है,
माँ तो माँ होती है।

Kapil Verma
May 9, 20201 min read
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