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'जीनू' के नाम

  • Writer: Kapil Verma
    Kapil Verma
  • Jun 9, 2021
  • 1 min read

Updated: Apr 20, 2025

एक अजीब से नाम वाली लड़की के नाम,

एक सुख़न मेरी सखी, मेरी बहन के नाम,

जो घर की फ़िक्र में अक्सर डूबे रहती है,

लेकिन कम न अपने भी मंसूबे रखती है।

बेफ़िक्री से जिसके सामने मुँहफट, निर्बुद्धु हम बनें,

वो छुटकी हमारे ख़ातिर माँ, दादी, बहन सब बनती है।


छोटी है तो बस उम्र से है, तजुर्बे उसे सब माँ से मिले,

माँ जैसे, गुस्सा भी तो, वो अपनी नाक पर रखती है।


हर ऊँच-नीच में, घर की रूखी दाल या शाही पनीर में,

नमक जैसे घुले रहती है, जो न हो तो हरसू खलती है।


पौधा ही थी जब, वक्त ने मांगा, तो ये शजर बन गई है।

माँ अपने पीछे उसे चट्टान सा खड़ा करके गई लगती है?

कुछ बात जो हो, तो घंटों चुप्पी में रहती है, फिर जैसे,

कुछ हुआ न था, सब कुछ भुलाकर, पहले सा मिलती है।


रश्क है, चींटियों को, महताब और आफ़ताब को उससे,

की, ये नादान इतना सब अकेले कैसे करती फिरती है?


क्या ख्वाहिशें हैं उसकी? हम क्या शायद, खुद भी न जाने,

कुनबे के आगे, दुनिया अपनी उसे, और कहाँ दिखती है?

जो मौसीक़ी है खामोशी में, जलते सहरा में पुरवाई है।

जो ने'मत है हमारी, मुफ़लिसी में वो हमारी कमाई है।

क्या सुख़न लिखूं उसके नाम? जो खुद, खुदा की रूबाई है।


A portrait of a smiling woman with dark hair, wearing a pink top. The background is a blend of blue and purple hues.

Meaning of:

  • सुख़न: बात, काव्य, बोल, Talk, Poetry

  • मंसूबे: संकल्प, इरादा, Plans, Projects

  • कुनबा: परिवार, Family

  • रश्क: जलन, ईर्ष्या, Jealousy

  • महताब: चांद, Moon

  • आफ़ताब: सूरज, Sun

  • शजर: वृक्ष, Tree

  • मौसीक़ी: संगीत, Music

  • सहरा: रेगिस्तान, Desert

  • ने'मत: ईश्वर का दिया हुआ धन, Godly riches

  • मुफ़लिसी : गरीबी, Poverty

  • रूबाई: चार पंक्तियों की एक कविता, Quatrain, A short poem

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©2021 by Kapil Verma

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