अर्जी
- Kapil Verma

- Dec 15, 2023
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Updated: Apr 20, 2025
जी करता है कुछ उबलता सा लिख दूँ,
लेकिन सीने की आग बुझ गई है,
और बुझती आग से याद आया,
एक इंसान कितनी बार मरता है?
रिश्तों में, किश्तों में,
उसके नाम के साथ-साथ मिटता है,
एक भाई, एक बाप, एक पति
या एक माँ, एक बहन, एक पत्नी।
इंसान के साथ ये रिश्ते जलते हैं, बुझते हैं।
मगर वक्त के सैल में,
जिंदगी के खेल में,
कुछ रिश्ते हमसे पहले बुझ जाते हैं।
जिनको हम खुद बनाते हैं,
जिनकी बुनियाद दोस्ती या इश्क़ होता है।
इस हिसाब से आधा तो मैं मर चुका हूँ!
मेरे पाठक यार, में बड़ा मतलबी हूँ,
अपना चश्म-ए-करम मुझ पर फरमाओ,
ज़रा मुझसे प्रीत बढ़ाओ,
मेरी उम्र बढ़ाओ।

Meaning of:
सैल: बाढ़, flood, running water
चश्म-ए-करम: कृपा-दृष्टि, favorable glance



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