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फ़हम

  • Writer: Kapil Verma
    Kapil Verma
  • Jun 30, 2022
  • 1 min read

Updated: Apr 13

अक्सर कुछ कोंधते ख्याल मुझे मेरे

आराम भरे बिस्तर से सीधा जमीं पर ले आते हैं।

जैसे कि, जज़्बात नहीं छोड़ते हमें या यादें?

या कि जब खोना ही है, तो पाना क्यूँ?

या जब जाना ही है, तो आना क्यूँ?

जब भुलाना ही है, तो जाना क्यूँ?

क्यूँ बात बनकर भी बात बनती नहीं?


फिर ज़रा ज़ेहन में, कुछ रेत सी सरसराती है और

बूढी अक्लों की माअमूरों से ये जवाब आता है,

कि "अरे गाफिल! पाने और खोने के बीच,

आने और जाने के बीच, इन सब के बीच

एक दुनिया है, जिसमें खो जाना ही रवा है,

जिसे जाने बगैर हयात का सफर राएगाँ है।"


A futuristic city rises from a floating island under a vibrant, sunset sky. Clouds surround the island, enhancing its mystical feel.

Meaning of:

  • फ़हम- समझ, विवेक

  • माअमूरा- बस्ती,

  • गाफिल- बेखबर

  • रवा- उचित

  • हयात- जिंदगी

  • राएगाँ- बेकार

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