तज़्किरा
- Kapil Verma

- Jul 11, 2025
- 1 min read
Updated: Jul 13, 2025
मिरी नज़र में सौ दफ़ा, गिरा हूँ मैं
पर इक निगाह में, बहुत बड़ा हूँ मैं
ये रास्तों के शोर, क्या बिगाड़ते?
ख़ुद अपनी आँधियों में गुम हुआ हूँ मैं
अजब नहीं कि तेरा तज़्किरा करूँ
यूँ तो तिरा ख़याल, तज चुका हूँ मैं
किसे पता वो कब उठे, निकल पड़े?
हर एक पल, ख़ुदी समेटता हूँ मैं
उजाड़ रेत में सदफ़ पुकारता -
"तुझे नहीं पता कि क्या रहा हूँ मैं?"
बचा रखा है इस हुनर ने ही मुझे
ग़मों को ही बिखेर कर जिया हूँ मैं

Meaning of:
तज़्किरा: चर्चा, बातचीत
ख़ुदी: आत्मा, स्वचेतना, आत्म ज्ञान
सदफ़: शंख
ग़ज़ल
Meter(बह्र): हज़ज (1212*3)



Comments