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किंग

  • Writer: Kapil Verma
    Kapil Verma
  • Dec 9, 2025
  • 1 min read

किंग लिखा है माथे पर

मायूसी है चेहरे पर


दर्द वहीं है अन्दर बस

ज़ख़्म नहीं हैं सीने पर


राहें बदली सहरा ने

पाँव रखे जब टीले पर


कुछ न रखा है बातों में

सब तो लिखा है चेहरे पर


दूरी ने वो काम किया

जो न हुआ था मिलने पर


पाँव नहीं जलते हैं अब

रेगिस्तान में चलने पर


फिर से उदासी फैल गई

पल-दो-पल चुप रहने पर


Meaning of:

  • सहरा : रेगिस्तान

ग़ज़ल

Meter (बह्र): बहर-ए-मीर (22 22 22 2)



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