एक दुआ
- Kapil Verma

- Jul 11, 2010
- 1 min read
Updated: Apr 20, 2025
ऐ ख़ुदावंद तेरे बन्दों को
चराग़-ए-रह-गुज़र दिखा दे।
तक़दीरों की ताबीर लिखा दे।
दस्तूरों की कैदों से महफ़ूज़ करा दे।
बिछड़े उन अक्षों को उनकी रज़ा दिला दे,
बदले में चाहे अदब का
सुधा सम ज़हर पिला दे।
शिकवों के बादल छँटा दे
दिलों से हमारे बे-दर्दी हटा दे
इस बन्दे को क़ाबिल-ऐ-उलफ़त बना दे
बदले में चाहे दर्द का मेघ घना दे
बस कर रहम इतना की
बन्दे को तेरे, सच्चा मुसाफिर बना दे
बस कर रहम इतना की
बुझ कर जलना सीखा दे,
उपजे जो आग मुझमें, उसी में
जलकर चलना सीखा दे।

Meaning of :
चराग़-ए-रह-गुज़र :पथ का दीपक, lamp of the way
ताबीर : अर्थ बताना/समझाना, Interpretation
दस्तूर : परंपरा, Rituals
महफ़ूज़ : सुरक्षा, Safe
रज़ा : इच्छा, Will
अदब : अनुशासन, Discipline
शिकवा : शिकायत, Complaint
सुधा : अमृत, Nectar



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