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एक तू ही है
एक तू ही है,
छाँव का बिछौना
साँवला सलोना,
बचपन का खिलौना,

Kapil Verma
Feb 24, 20212 min read


लाज़मी अहसास
ख़ुश-चेहरे ही अपने नहीं
अपनों को भी हसीं मानो।
दिलकश सपनों का साहिल
आँखों तक कामिल जानो।

Kapil Verma
Feb 4, 20211 min read


Mumma
Mumma, you come to my dreams as if you’ve never been gone

Kapil Verma
Sep 25, 20202 min read


मेरे पापा
मुँह पर ज़रा न करते थे तारीफ़ें वो,
पीछे बड़े क़सीदे कसते थे पापा।

Kapil Verma
Jul 11, 20202 min read


माँ तो माँ होती है
भर देती पेट हमारा
खुद भले भूखे सोती है।
आँसुओं से गले में हमारे,
माला मोतियों की पिरोती है,
माँ तो माँ होती है।

Kapil Verma
May 9, 20201 min read


उड़ानें
परिंदों की बस्ती में सीखने चले थे उड़ना,
सपेरों से, रेंगने का तजुर्बा लेकर आ गए।

Kapil Verma
Apr 2, 20201 min read


Me talking to me
How wonderful it would’ve been,
If we could talk to ourselves about younger skin.

Kapil Verma
Jul 23, 20191 min read


एक दुआ
ऐ ख़ुदावंद तेरे बन्दों को
चराग़-ए-रह-गुज़र दिखा दे।

Kapil Verma
Jul 11, 20101 min read


धर्म की हजामत
ऐ जिंदगी तेरी इबादत में

Kapil Verma
Apr 10, 20101 min read
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